कबिता
#~डुबकियाँ सिंधु मे गोताखोर लगता है,
जा-जाकर खाली हाथ लौट आता है,
मिलते न सहज ही मोती गहरे पानी में,
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नही होती,
कोशिश करने वालो की हार नही होती।
#~लहरों से डरकर नौका पार नही होती,
कोशिश करने वालो की हार नहीं होती।
#~नन्हीं चींटी दाना लेकर चलती है,
दीवारों पर चढ़ती,सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रंगौ मे साहस भरता हैं,
चढ़कर गिरना गिरकर चढना न अखरत्ता है।
आखिर उसकी मेहनत बेकार नही होती,
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।
#~असफलता एक चुनौती है,स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई देखो और सुधार करो।
जबतक न सफल हो,नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्षो का मैदान छोड़ मत भागो तुम।
कुछ किए बिना ही जय-जयकार नही होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।
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